
परिचय –
आम देश भर में उगाया जाने वाला वो फल है जो बच्चो से लेकर बूढ़ो को पसंद है। आम की खेती भारत में सालो से की जा रही है क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण फल है। आम आर्थिक रूप से ही नहीं बल्कि यह स्वास्थ्य के रूप से भी लाभदायक है।
आम में प्रचुर मात्रा में विटामिन्स (Vit . A और C ) पाए जाते है। आम का उपयोग गर्मियों के मौसम में ज्यूस के रूप में जायदातर किया जाता है।
आम से आचार, केन्डी, चटनी आदि खाने की चीजें बनाई जाती है।
बड़े या सीमांत किसानों के लिए आम की खेती करना बहुत लाभदायक हो सकता है, यह किसानो को अच्छी आय देते है। तो आइये जानते है की आम की खेती की शुरुआत कैसे कर सकते है।
आम की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु व मिट्टी –
आम के पौधो की अच्छी वर्द्धि और फल के विकास के लिए एक निश्चित जलवायु और मिट्टी की आवयश्कता होती है।
1. जलवायु (Climate) – आम के लिए गर्म और सुखी जलवायु अच्छी रहती है। इसे सूर्य के प्रकाश की अधिक आवयश्कता रहती है, इसलिए इसकी खेती ऐसी जगह पर करे जहाँ सूर्य की रौशनी अच्छी रहती हो।
आम के लिए 24 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा माना जाता है।
2. मिट्टी (soil ) – आम की खेती के लिए दोमट और जलनिकासी मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। इसके लिए मिटटी का PH मान 5.5 से 7.5 के बिच अच्छा रहता है।
जहाँ चिकनी मिट्टी हो वहा आम की खेती नहीं करनी चाहिए, इसके लिए जलनिकासी वाली मिट्टी अच्छी रहती है।
खेत की तैयारी –

आम की खेती के लिए सही स्थान का चयन कर उसकी तैयारी करना बहुत जरुरी है। जहा हम आम की खेती कर रहे है वहा पर पर्याप्त मात्रा में पौधो को धूप मिलनी चाहिए और जमीन जलभराव से मुक्त होनी चाहिए।
भूमि की शुरूआती तैयारी में गहरी जुताई करके मिट्टी में गोबर की खाद को मिला देना चाहिए जिससे की कार्बनिक पदार्थो की मात्रा बढ़ जाए। फिर एक निश्चित दुरी पर गड्डे खोदकर उसमें खाद मिलकर 10 से 15 दिनों के लिए खुला छोड़ देना चाहिए।
इन सभी बातों पर ध्यान देकर, किसान आम की खेती को सफलतापूर्वक कर सकते हैं, और अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं।
आम की प्रमुख किस्मे –
आम की खेती के लिए आम की प्रमुख किस्मो का चयन करना बहुत जरुरी है, क्योंकि अलग – 2 किस्मो के लिए अलग – 2 तापमान, मिट्टी की जरूरत होती है।आम की कुछ महत्वपूर्ण किस्मे –
- दशहरी – यह एक छोटे आकार की किस्म है, जिसके फ़ल बहुत मीठे होते है।
- लंगड़ा – इस किस्म में रेसा नहीं पाया जाता है यह एक रसदार आम है।
- अल्फांसो – इसके फल बहुत मीठे होते है जिनका प्रयोग बाहर विदेशो में भेजने के लिए किया जाता है।
- नीलम – यह आम की देर से पकने वाली किस्म है जो बहुत मिट्ठी होती है।
आम की खेती के लिए सिंचाई –

फसल कोई भी हो पानी की जरूरत तो होती ही है, आम को लगाने के बाद 2 – 3 साल तक नियमित रूप से पानी देना चाहिए ताकी पौधे की वर्द्धि अच्छी हो सके और पौधा मजबूत हो सके।
शुरू की अवस्था में 7 से 10 के अंतर में सिचाई करनी चाहिए, बाद में गर्मियों के मौसम में 10 से 15 दिनों के अंतर में पानी देना चाहिए।
फूल आने के समय पर सिंचाई की मात्रा व समय का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि कम या ज़्यादा पानी से फूल जड़ जाते है और फ़सल खराब हो जाती है।
आम की खेती के लिए ड्रिप सिंचाई का प्रयोग करना चाहिए जिससे पानी की बचत भी होती है।
खाद और उर्वरक –
आम के पौधो के लिए खाद और उर्वरक का प्रबधन करना बहुत जरुरी है, क्योंकि यह पौधे की वर्द्धि ही बढ़ाते बल्कि फलों की उत्पादकता और गुणों को भी बढ़ाते है जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलते है।
- गोबर की खाद – हर साल 20 – 25 Kg गोबर की खाद को प्रति पौधे के हिसाब से देनी चाहिए। क्योंकि यह मिट्टी में कार्बनिक पदार्थो की मात्रा में वर्द्धि करती है और साथ ही पौधों को आवयश्क पोषक तत्व भी प्रदान करती है।
- उर्वरक – पहले साल – 200 ग्राम नाइट्रोजन (N), 150 ग्राम फॉस्फोरस (P), 150 ग्राम पोटाश (K) प्रति पौधा।
इसके बाद में हर साल धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं, जब तक पेड़ पूरी तरह से वर्द्धि ना कर ले। परिपक्व हुए पेड़ को 1 किलो N, 750 ग्राम P, 750 ग्राम K हर साल देना चाहिए।
तुड़ाई और भंडारण –

जब आम पूरी तरह से पक जाते है तो उनकी समय पर तुड़ाई करना भी बहुत जरुरी है, क्योंकि आम को बहुत पहले या बाद में तोड़ने पर इसकी गुणवत्ता कम हो जाती है जिससे बाज़ार में इसका सही दाम नहीं मिल पाता है।
जब आम हल्का सा रंग बदलने लगे तो उसकी तुड़ाई कर लेनी चाहिए। आम को तोड़ते समय इसे जमीन पर नहीं गिराना चाहिए। क्योंकि इससे फ़ल जल्दी ख़राब हो जाते है।
आम का भंडारण ऐसी जगह में करना चाहिए जहां पर वो जल्दी से ख़राब न हो जाए। तुड़ाई के बाद आम को बांस की टोकरियों में रख देना चाहिए।
निष्कर्ष –
आम एक ऐसी फसल है जो लगाने के बाद लम्बे समय तक फलन देती है। यह किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प है, इससे अच्छा मुनाफ़ा कमाया जा सकता है।
शुरुआत में मेहनत लगती है परन्तु बाद में इसकी देखभाल आसान हो जाती है। आम की खेती के लिए रोगो व कीटों का प्रबंधन बहुत जरुरी है, साथ ही इसमें जैविक खेती को भी बढ़ावा देना चाहिए।
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