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मधुमखी पालन : Full Guides For Beginners

परिचय –

हमारे घर में जो शहद होता है, जिसे हम सीधा या किसी अन्य चीज के साथ खाते है क्या आपने कभी सोचा है कि यह हमारे घर तक कैसे आता है या बाजार में यह कहा से आता है? इस शहद को मधुमखियों के छतो से निकाला जाता है जिसे बाद में स्टोर कर बेचा जाता है। मधुमखियाँ फूलों से रस चूसती है जिसे बाद में अपने छते में एकत्र कर लेती है, जिसे हम प्राप्त कर लेते है।

इन्ही मधुमखियो की वजह से हमारे खेत में फसल होती है क्योंकि जब ये एक पौधे से दूसरे पौधे पर रस चूसने के लिए जाती है तो परागकणों का स्थान्तरण कर देती है। इसलिए मधुमखियाँ हमारे जीवन के लिए अति आवयश्क और लाभदायक है।

मधुमखी पालन एक अच्छा व्यवसाय बन चूका है लाखो किसान मधुमखी पालन कर रहे है और अच्छा मुनाफ़ा कमा रहे है, किसानो के लिए यह एक अतिरिक्त आय का अच्छा स्त्रोत है।

मधुमक्खी पालन के फायदे –

1. शुद्ध शहद मिलता है – मधुमक्खियों से हमें प्राकृतिक रूप से अच्छा और सेहतमंद शहद मिलता है, जो की बाजार में भी महंगे दामों पर बिकता है।

2.कम जमीन में काम – मधुमखी पालन के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती है इसके डिब्बों को खेत के चारों तरफ भी रखा जा सकता है।

3.परागण में मदद – मधुमक्खियां फूलो से पराग को लेकर दूसरे फूलों तक पहुँचाती है।

4.अन्य उत्पाद – शहद के अलावा भी मधुमक्खियों से अन्य उत्पाद भी मिलते है जैसे की मोम, रॉयल जेली, बी वैक्स और प्रोपोलिस आदि।

5.रोजगार का साधन – मधुमखी पालन रोजगार का एक अच्छा साधन है जिससे गावों में अनेक लोगों को काम मिलता है।

मधुमक्खियों की प्रमुख प्रजातियाँ –

मधुमक्खियों की अनेक परजातियाँ होती है परन्तु पाला कुछ मुख्य जातियों को ही है जैसे की –

1.भारतीय मधुमक्खी (Apis cerana indica) – ये सामान्य रूप से भारत में पाई जाने वाली मधुमखी है इसलिए इसे भारतीय मधुमक्खी ही कहा जाता है,

2.यूरोपीय मधुमक्खी (Apis mellifera) – यह विदेशो में पाई जाने वाली प्रजाति है जिससे अधिक शहद प्राप्त होता है।

3.छोटी मधुमक्खी (Apis florea) – इस प्रजाति को पालना आसान नहीं होता है और इससे शहद भी कम मिलता है।

4.जंगली मधुमक्खी (Apis dorsata) – इन्हे पाला नहीं जा सकता है।

मधुमखी पालन के लिए मुख्य रूप से Apis cerana और Apis mellifera प्रजाति का उपयोग किया जाता है।

मधुमक्खी पालन की शुरुआत कैसे करें –

मधुमक्खी पालन को शुरू करने के लिए हमे कुछ बातो का ध्यान रखना जरुरी होता है जैसे की

1.स्थान का चयन – मधुमक्खी को पालने के लिए खेत के आस पास की जगह का चुनाव करना चाहिए जहां फसलें अच्छी हो ताकि उनको भोजन मिल सके और इसके साथ फसलों का परागण भी हो जाता है। भोजन के साथ – साथ पानी की भी सुविधा होनी चाहिए पास में कोई तालाब या नहर होनी चाहिए।

2.आवश्यक उपकरण – मधुमखियों को पालने के लिए सभी आवयश्क उपकरणों का होना बहुत जरुरी है ताकि मधुमक्खीयों का सही से प्रबंधन किया जा सके जैसे किसान को मधुमक्खी बॉक्स (Bee Hive), सेफ्टी किट (ग्लव्स, मास्क, सूट), स्मोकर, हनी एक्सट्रैक्टर, ब्रश और चाकू को समय पर खरीद लेना चाहिए।

3.कॉलोनी प्राप्त करें – मधुमक्खियों को पालने के लिए सबसे पहले कॉलोनी को खरीदना होता है जिसमे मधुमखियाँ होती है मधुमक्खियों की कॉलोनी को किसी नजदीकी कृषि केंद्र या प्रमाणित जगह से खरीद सकते है। एक बॉक्स में करीब 5,000 से 10,000 मधुमक्खियाँ होती हैं।

4.शुरुआती खर्चा – एक बॉक्स की कीमत ₹3,000 से ₹5,000 तक होती है। किसान 5 बॉक्स से शुरू कर सकते हैं, जिसमें ₹25,000 से ₹30,000 का खर्च आएगा।

मधुमक्खियों की देखभाल कैसे करें –

मधुमक्खियों की देखभाल करना बहुत जरूरी होता है इससे उत्पादन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। हर हफ्ते मधुमक्खियों की कॉलोनी की जांच करें। अत्यधिक गर्मी या सर्दी होने पर विशेष देखभाल की जरूरत होती है। अगर सूखे की स्तिथि हो तो भोजन की कमी हो जाती है जिसकी पूर्ति के लिए शुगर सिरप दें, कॉलोनी में बीमार या मरी हुई रानी मधुमक्खी को पहचानें और बदलें।

शहद निकालना और संग्रहण –

शहद निकालने का सही समय फरवरी से मई और अक्टूबर से दिसंबर के बीच होता है। शहद निकालते समय यह ध्यान रखें कि रानी मधुमक्खी को कोई नुकसान न हो। शहद को निकालने के बाद में अच्छे से छानकर डिब्बों में भरकर स्टोर किया जाता है। 1 बॉक्स से साल में 8 से 12 किलो शहद आसानी से निकाला जा सकता है।

मधुमक्खियों की बीमारियाँ और कीट नियंत्रण –

मधुमक्खियों को भी बीमारियाँ और कीट लगने पर अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो पूरा बॉक्स खराब हो सकता है। मधुमक्खियों को निम्न बीमारियाँ और कीट लगते है –

1.वैरोआ माइट – ये छोटे – 2 कीड़े जैसे किट होते है जिससे मधुमक्खियाँ कमजोर हो जाती है।

2..अमेरिकन फाउल ब्रूड – मधुमक्खियो के बच्चों में से बदबू आती है कोशिकाए मर जाती है।

3.नोजेमा रोग – पतला मल करती है और सुस्त हो जाती है।

4.वैक्स मॉथ – फ्रेम के अंदर जले बन जाते है, सफाई करना जरूरी है।

निष्कर्ष –

मधुमक्खी पालन किसानो के लिए एक अच्छा विकल्प है जिसमे कम खर्च, कम जगह और कम मेहनत से अच्छा मुनफा कमाया जा सकता है। इससे सिर्फ शहद ही नहीं मिलता बल्कि फसलें भी अच्छी होती है जिससे आमदनी बढ़ती है।

आज के समय में अनेक युवान और किसान मधुमक्खी पालन को अपना रहे है और अच्छा मुनाफ़ा कमा रहे है।

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