
1. परिचय –
सेब एक बहुत पसंद किया जाने वाला फ़ल है, जिसका ज्यादातर उपयोग बीमार लोग करते है क्योंकि यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है और शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी देता है। सेब एक ऐसा फल है अगर हम इसे रोज खाए तो हमे कभी कोई बीमारी नहीं होगी जिससे हमे कभी भी डॉक्टर की जरूरत नहीं होगी।
भारत में भी अब सेब की खेती लाभदायक बन चुकी है। पहले ज्यादातर पहाड़ी इलाके में इसकी खेती की जाती थी परन्तु अब मैदानी जगहों पर भी किसान इसकी खेती करने लग गए है।
2. सेब की खेती के फायदे –
सेब एक ऐसा फल है जो पुरे साल बाज़ार में मिलता है और पुरे साल इसकी मांग बनी रहती है, इसलिए किसानों को दाम भी अच्छे मिलते है जिसकी वज़ह से किसानो को अच्छा मुनाफा होता है। सेब के पेड़ लगाने के बाद यह लगातार कई साल तक फल देता है, जिसकी वजह से किसानों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।
ज्यादातर सेब का उपयोग सीधा नास्ते में खाने में किया जाता है, परन्तु इसका उपयोग ज्यूस, जैम, चटनी और मिठाइयों में भी होता है। इसमें अच्छी मात्रा में फाइबर, विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करते है और बीमारियों से हमारी सुरक्षा भी करते है।
अगर अच्छी देखभाल के साथ किसान इसकी खेती करता है तो यह साल में लाखों की कमाई कर सकते है।
3. सेब की खेती के लिए जलवायु और मिट्टी –

सेब की खेती ठण्डी जलवायु में की जाती है जहा का तापमान 7 से 25 डिग्री सेल्सियस तक हो, क्योंकि इसके अच्छे बढ़वार के लिए ठण्डा मौसम जरुरी है ताकि यह गर्मी में फल दे सके।
सेब की खेती के लिए दोमट मिट्टी (loamy soil) सबसे अच्छी मानी जाती है, क्योंकि इसमें पानी नहीं रुकता है जिससे जलभराव की समस्या नहीं आती है, और इसमें जड़ो को हवा भी मिल जाती है। साथ ही मिट्टी का pH मान 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए ताकि पौधा अच्छी बढ़वार कर सके।
4. सेब की प्रमुख किस्में –
भारत में किसानों के द्वारा कई तरह के सेब उगाए जाते हैं। जिनमे से कुछ प्रमुख किस्में नीचे दी गई हैं –
1.रेड डिलीशियस – यह सेब की सबसे ज़्यादा उगाए जाने वाली किस्म है।
2. गोल्डन डिलीशियस – इस क़िस्म के सेब का रंग हल्का पीला होता है।
3. रॉयल गाला – ज़्यादातर बाज़ार में यही क़िस्म मिलती है।
4. अंब्री – सेब की खेती ज्यादातर हिमाचल प्रदेश में ही की जाती है और यह हिमाचल की एक प्रसिद्ध किस्म है।
5.खेत की शुरूआती तैयारी –

सेब की सफ़ल खेती के लिए खेत की शुरूआती तैयारी करना बहुत जरुरी है ताकि पौधों की बढ़वार अच्छे से हो सके और अच्छे फल मिल सके। खेत की अच्छे से जुताई करके मिट्टी को नरम और भुरभुरा किया जाता है साथ ही खेत से सभी खरपतवारो को हटा या जला दिया जाता है। पोधो को लगाने के लिए खेत में 1 x 1 मीटर के गड्ढे खोदें जाते है, गड्ढेो को अच्छी तरह से गोबर की खाद और मिट्टी मिलाकर भर दिए जाते है और धुप में खुले छोड़ दिए जाते है।
6. सिंचाई योजना –
जब शुरुआत में सेब के पौधे छोटे होते हैं, तो हर 7-10 दिन में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। पेड़ के बड़े होने पर गर्मी में हर 15 दिन में और सर्दियों में महीने में एक बार सिंचाई करनी पड़ती है ताकि पौधों की पानी की जरूरत पूरी हो सके।
पौधों को पानी देने के लिए ड्रिप सिंचाई का उपयोग करना चाहिए ताकि पानी की बचत हो और पौधे को जरुरत के हिसाब से पानी मिलता रहे।
7. खाद और उर्वरक –

सेब के अच्छे उत्पादन के लिए पौधों को समय-समय पर पोषण देना जरूरी है. ताकि इनकी बढ़वार अच्छी हो सके और अच्छे गुणवत्ता वाले फल मिल सके।
खेत में हर साल 20-25 किलो प्रति पौधे के हिसाब से गोबर की खाद देनी चाहिए ताकि पोधो और मिटटी की सेहत बनी रहे।
इसके साथ अच्छे फल उत्पादन के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश (NPK) पौधे की उम्र के हिसाब से दे और जिंक, बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व: साल में एक-दो बार जरूर दे।
साथ में ध्यान रखें की, खाद देने के बाद सिंचाई ज़रूर करें।
8. कीट और बीमारियाँ –
सेब में ज़्यदातर सेब तना भेदक, फल मक्खी ,लाल स्पाइडर माइट जैसे किट लगते है जो फलों को नुक़सान पहुंचाते है जिसकी वजह से उत्पादन कम हो जाता है और किसान को नुकसान होता है।
इनकी रोकथाम के लिए नीम के तेल या जैविक कीटनाशक का छिड़काव करें, रोगी टहनियो को काट दें, समय-समय पर पौधे की जांच करें ताकि समय रहते इनका उपचार हो सके।
सेब को कुछ प्रमुख बीमारियाँ भी नुकसान पहुँचाती है जैसे की – स्कैब (पत्तियों पर धब्बे), फायर ब्लाइट, पाउडरी मिल्ड्यू आदी।
इनकी रोकथाम के लिए खेत में रोग प्रतिरोधी किस्में लगाएं, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या सल्फर आधारित दवा का प्रयोग करें, संक्रमित पत्तियां तुरंत हटा दें।
9. सेब की तुड़ाई और भंडारण –

सेब को तैयार होने में लगभग 5-6 महीने लगते हैं। जब सेब रंग बदलने लग जाए और नरम हो जाए तो समझ लेना चाहिए की सेब तुड़ाई के लिए तैयार है।
सेब को तोड़ते समय ध्यान रखना चाहिए की फल दबे नहीं। एक जैसे आकार के सेब एक साथ पैक करें और ठंडी और हवादार जगह पर रख दे। कोल्ड स्टोरेज में सेब को 3-4 महीने तक ताजा रखा जा सकता है।
10. निष्कर्ष –
सेब की खेती मेहनत से की जाने वाली खेती है, लेकिन एक बार सही तरीके से शुरू करने के बाद यह कई सालों तक मुनाफा देती है और किसान को बाद में ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती है । जो किसान कोई नहीं खेती करना चाहते है उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। किसान सही किस्म चुनकर, समय पर खाद और पानी देकर अच्छी खेती कर सकते है।
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